Alka (अलका) - Nirala,Suryakant Tripathi
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इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जन साधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन का चित्रण किया है। पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आन्दोलन का वह चरण है जब प्रथमत विश्व यद्ध के बाद गांधीजी ने आन्दोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी। यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आन्दोलन में कूद पड़े। जिनमें वकील-बेरिस्टर और पूंजीपति तबके के नेता प्रमुख रूप से शामिल थे। इस नेतृत्व का एक हिस्सा किसानों-मजदूर ... Visas aprašymas
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Aprašymas
इस उपन्यास में निराला ने अवध क्षेत्र के किसानों और जन साधारण के अभावग्रस्त और दयनीय जीवन का चित्रण किया है। पृष्ठभूमि में स्वाधीनता आन्दोलन का वह चरण है जब प्रथमत विश्व यद्ध के बाद गांधीजी ने आन्दोलन की बागडोर अपने हाथों में ली थी। यही समय था जब शिक्षित और संपन्न समाज के अनेक लोग आन्दोलन में कूद पड़े। जिनमें वकील-बेरिस्टर और पूंजीपति तबके के नेता प्रमुख रूप से शामिल थे। इस नेतृत्व का एक हिस्सा किसानों-मजदूरों के आन्दोलन को भर देने के पक्ष में नहीं था। निराला ने इस उपन्यास में इस निहित वर्गीय स्वार्थ का स्पष्ट उल्लेख किया है।
Daugiau informacijos
| Autorius | Nirala, Suryakant Tripathi |
|---|---|
| Leidėjas | Repro India Limited |
| Išleidimo metai | 2022 |
| Viršelio tipas | Minkšti viršeliai |
| EAN | 9789355990570 |